पहले प्यार की गाड़ी
बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में था। मैं अपने दोस्त के यहां कुछ दिनों के लिए छुट्टियां बिताने गया था।मैं रास्ते से गुज़र रहा था कि मेरी नज़र एक सुंदरी पर पड़ी।वह अपने घर के बालकनी में बैठी कुछ सोच रही थी।मेरी नज़र उस पर पड़ी, ठीक उसी वक्त उसकी नज़र मेरे पर पड़ी।हमारी आंखें चार हुई।हमदोनो एक दूसरे को एकटक देखे जा रहे थे।मेरी तंद्रा तब टूटी जब मेरे दोस्त ने मुझे पुकारा।एक पल के लिए मुझे क्या हुआ तब मैं नहीं समझा।पर आज समझा कि वह पहला प्यार था।
फिर उसके बाद मुलाकात नहीं हुई।क्योंकि अगले दिन वह अपने माता- पिता के साथ किसी दूसरे शहर चली गई।और मैं भी दो- तीन दिन बाद अपने घर वापस आ गया। लेकिन वह प्यारी सी आंखें बार-बार याद आती।फिर सपनों में उसकी सागर-सी आंखों में गोता लगाता।
कुछ वर्षों बाद अचानक वह मेरे शहर के एक मॉल में दिखी।मैं कुछ पल के लिए अवाक रह गया कि वह यहां कैसे।उसकी नज़र मेरे पर पड़ी।मैं वहां से जाने ही वाला था कि उसने मुझे पुकारा।मैं अंदर-ही-अंदर खुशी से पागल हुआ जा रहा था कि दो पलों की मुलाकात उसे याद है।
कुछ देर बातें करने के बाद मैंने पूछा- क्या तुम्हें मैं याद आता हूँ। Do you love me?पहले तो वो शरमाई, फिर मुस्कुराई और फिर हाँ में गर्दन हिलाया।और मेरे प्यार की गाड़ी चल पड़ी।
