Mausham Jayaswal
Mausham JayaswalCourseLiteratureReviews
14 Dec 2021·3 min read·

रूढ़िवादिता पर करारा प्रहार करती है फ़िल्म "चंडीगढ़ करे आशिक़ी"

भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स के लोकप्रिय होने के बाद से धीरे-धीरे ही सही पर भारतीय सिनेमा का स्वरूप बदल रहा है। अब चूँकि दर्शक स्टारडम से ज्यादा कंटेंट को तवज्जो दे रहे हैं। इसलिए अब निर्माता-निर्देशक भी अपनी फ़िल्म के करोड़ी क्लब में शामिल होने की फिक्र के बजाय दर्शकों के लिए नए वाचिंग पैटर्न गढ़ने में लगे हैं। तो वहीं कलाकार भी भाईगिरी या हीरोगिरी वाली स्क्रिप्ट्स के बजाय अपने लिए चैलेंजिंग और लीक से हटकर किरदार चुनने का जोख़िम उठा रहे हैं।

हालिया रिलीज फ़िल्म 'चंडीगढ़ करे आशिकी' के ज़रिए फिल्म निर्देशक अभिषेक कपूर नें बॉलीवुड के उसी नए वाचिंग पैटर्न को गढ़ने की कोशिश है, जिसमें वो काफी हद तक सफल भी हुए हैं। अभिषेक कपूर की पिछली फिल्मों रॉक ऑन और काई पो छे पर गौर करें तो वो सारी बातें इस तरफ इशारा करती हैं कि अभिषेक उन फिल्म निर्देशकों में से एक हैं जो कमर्शियल फॉर्मेट में रह कर भी कुछ अलग करने की कोशिश करते हैं। उनकी ताजा फिल्म 'चंडीगढ़ करे आशिकी' की कहानी मानवी बरार (वाणी कपूर) नाम की एक ट्रांस गर्ल की प्रेम कहानी है। भारत जैसे रूढ़िवादी, परंपरावादी देश में जहाँ समलैंगिकता जैसे विषयों पर खुलकर बात होने की बजाय उसका मजाक बनाया जाता है, उन्हें घृणा की भावना से देखा जाता है।

पिछले कुछ सालों में जबसे OTT प्लेटफॉर्म्स का बाज़ार भारत में रफ्तार पकड़ा है, तबसे 'Content is Boss' की थ्योरी भारतीय मनोरंजन उद्योग में प्रचलित हो चली है। ऐसे में समलैंगिकता और ऐसे अन्य टैबू विषयों की सामाजिक स्वीकार्यता भले ही धीमी हो पर न सिर्फ इन्हें सामाजिक रूप से स्वीकारा जा रहा है बल्कि फिल्मों और वेब-सीरीजों में उनका सकारात्मक चित्रण भी किया जा रहा है। जो कि  एक अच्छी और सार्थक शुरुआत है सामाजिक उत्थान की।

आयुष्मान खुराना अपनी अदाकारी और एक से एक बेहतरीन चैलेंजिग किरदारों के चयन के बदौलत सफलता की पर्यायवाची होते जा रहे हैं। उनका फ़िल्म में होना ही फ़िल्म के सफल होने की निशानी हो गयी है। आयुष्मान की 'विकी डोनर' से लेकर 'चंडीगढ़ करे आशिक़ी' तक उनके सारे किरदार एक दूसरे से न सिर्फ काफी अलग है बल्कि एक गहरा सामाजिक संदेश भी देते हैं। इस बार एक चंडीगढ़ी मुंडे के किरदार में आयुष्मान न सिर्फ दर्शकों की तालियाँ बटोरते दिखते हैं बल्कि प्रभावित भी करते हैं।

इस फ़िल्म के सारे किरदार सीधे कनेक्ट होकर दर्शकों को न सिर्फ गुदगुदाते हैं बल्कि प्रभावित भी करते हैं जिससे फिल्म की रोचकता आखिरी फ्रेम तक बनी रहती है। फ़िल्म में कॉमेडी का डोज़ इतना तीव्र है कि फिल्म का एक दृश्य भी नहीं अखड़ता है। इस फ़िल्म के किरदार के लिए आयुष्मान ने जिस तरह की तैयारी की है और चंडीगढ़ के एक मुस्टंड का जो एटीट्यूड उन्होंने पकड़ा है वो न सिर्फ कमाल का है, बल्कि ये साबित भी करता है कि वो एक बेहतरीन कलाकार हैं। वाणी कपूर भी एक ट्रांस गर्ल के किरदार में सरप्राइज करती है। बाकी अन्य कलाकारों में योगराज सिंह, कंवलजीत सिंह, गिरीश धमिज़ा, अंजन श्रीवास्तव ने भी प्रभावित किया है। 

आख़िर में बस इतना ही की ये फ़िल्म मनोरंजन के साथ-साथ रूढ़िवादिता पर भी एक करारा प्रहार करती है। आने वाले समय में सामाजिक टैबू माने जाने वाले विषयों पर न सिर्फ और फिल्में बनेंगी बल्कि बड़े कलाकार ऐसे स्क्रिप्ट्स को तवज्जो भी देंगे।

निर्माता : भूषण कुमार, प्रज्ञा कपूर, कृष्ण कुमार, अभिषेक नय्यर  निर्देशक : अभिषेक कपूर संगीत : सचिन-जिगर  कलाकार : आयुष्मान खुराना, वाणी कपूर, कंवलजीत सिंह, अंजन श्रीवास्तव