Mausham Jayaswal
Mausham JayaswalCourseLiteratureReviews
4 Aug 2021·2 min read·

भारतीय महिला हॉकी टीम

मंजिल मिल ही जाएगी एक दिन भटकते-भटकते ही सही, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं।

भारतीय टीम और खिलाड़ियों द्वारा जीत दर्ज करने पर बधाई देने या सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से ज्यादा जरूरी है, खिलाड़ियों द्वारा ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर किए जा रहे देश के प्रतिनिधित्व और उनके बेहतर प्रदर्शन के बदले उनका मनोबल बनाए रखना। फिर चाहे मैच का फैसला हक़ में आए या न आए। किसी भी सूरत में उन पर भरोसा क़ायम रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

पिछले दिनों कमलजीत कौर के फाइनल में पहुँचने के बाद भी भारत की झोली ऐथलेटिक्स में भले ही खाली रह गयी हो। या फिर 41 साल बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम का सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद भी गोल्ड या सिल्वर मेडल के लिए दावेदारी मजबूत न कर पाना, भले ही एक बार को भारतीय समर्थक होने के नाते मायूस करता हो।

पर इन सबके बावजूद उन भारतीय खिलाड़ियों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया और जिस जोश व जज्बे के साथ उन्होनें टोक्यो ओलंपिक 2020 को यादगार बनाया, उसके इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया। वो न सिर्फ भारत में हॉकी, बैडमिंटन और एथेलेटिक्स बल्कि अन्य वो सारे खेल जिनमें फिलहाल भारत बमुश्किल अपनी टीम भेज पाता है उन सारे खेलों को एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

भारत में एक तरफ क्रिकेट जैसे खेल जिसके स्पॉन्सरशिप लिए बड़ी-बड़ी कंपनियाँ दांव लगाती है तो वहीं दूसरी तरफ हमारे राष्ट्रीय खेल हॉकी समेत दूसरे खेलों को स्पॉन्सर ही नहीं मिलते। पर फिर भी इन सबसे इतर हमारे खिलाड़ी तमाम तरह की मुश्किलों का सामना करते हुए जी-जान लगाकर खेलते हैं ताकि वो हमें गौरवान्वित करने वाले क्षण दे सकें। पर किसी कारणवश जब वो चूक जाते हैं और ओलंपिक जैसे मंचों पर हम मेडल्स के सूखे का सामना करते हैं। तब हमारी नींद खुलती है और हम तब खिलाड़ी और उनकी तैयारियों पर सवाल उठाना शुरू कर देते है, जबकि ऐसे समय में वो हमसे उनका मनोबल बनाए रखने, उनपर भरोसा रखने की अपेक्षा करते हैं। ताकि वो उसी जोश-जुनून के साथ अगले टूर्नामेंट की तैयारियों में जुट सके।

मैं ये नहीं कहता कि हमें सवाल नहीं पूछना चाहिए। जरूर पूछिए पर सही समय पर सही व्यक्ति से जो इन सबके प्रति जवाबदेही रखता हो। और फिर मेडल्स की झड़ी न लगे तब खिलाड़ियों पर सवाल उठाइए। पर उसके पहले खिलाड़ियों को कोसने के बजाय उन पर भरोसा करना सीखिए। ताकि उन्हें स्पॉन्सरशिप के लिए किसी से गुहार न लगानी पड़े क्योंकि स्पॉन्सरशिप मिलने और न मिलने के पीछे कहीं न कहीं हमारा भरोसा ही अहम रोल निभाता है।

आज भारतीय महिला हॉकी टीम का ओलंपिक सेमीफाइनल का मुकाबला है। जिस तरह से भारतीय लड़कियाँ खेल रही है उन्हें फाइनल में जरूर पहुँचना चाहिए। पर खेल है तो मुमकिन है कि फैसला किसी भी टीम के पक्ष में जाए। खैर मैच का फैसला जो भी होगा वो भविष्य के गर्भ में समाहित है। हमें तो फिलहाल उनका मनोबल बढ़ाते रहने और अपना बेस्ट देने के लिए उन्हें प्रेरित करने की जरूरत है।

जीत की बधाइयाँ दीजिए पर फैसला हक़ में न पर भी उनके जुझारूपन और बेहतर खेल दिखाने के लिए शाबाशी देते रहिए। ताकि वो पिछले मैच के नतीजे को भूलकर आगे की तैयारियों में जुट सकें।

© मौसम जायसवाल